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Gaon Ka Bachcha

Gaon Ka Bachcha

गाँव का बच्चा
Publisher: Eklavya
Author: Zen Koven Flechar
Translator: Arundhati Devasthale
Illustrator: Zen Koven Flechar
ISBN: 978-81-7655-907-2
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 36
Published: 0000-00-00
Regular price ₹ 120.00
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Read the heartwarming story of two siblings in an African village. Little Yemi has the responsibility to take care of her younger brother Koku. Will she be able to do it? Read the story, bolstered by dramatic pictures.

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Customer Reviews

Based on 2 reviews
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K
Kumud Wadhwani
Book review

गाँव का बच्चा अफ़्रीका की कहानी हो कर भी अपनी लगती है । बच्चों की कहानी बच्चों के लिए ।

S
Simran uikey
येमी तो बड़ी हो गई

गांव का बच्चा यह कहानी पढ़ कर मुझे अपनी बस्ती के बच्चों की याद आ गई।जैसे कि इस कहानी में कोकू का ख्याल बाजार के सारे लोग रखते हैं। वैसे ही हमारी बस्ती में खेल रहे बच्चे उनका ख्याल बाहर बैठी महिलाएं या कोई महिलाएं जो काम कर रहे हैं।वह रखती है इस कहानी में बाजार के लोगों के अंदर प्रेम भाव और भाईचारा नजर आता है।जो हमें एक दूसरे की मदद करने में मिलती है।कहानी में येमी अपने भाई का ख्याल अच्छे से रखती है। येमी की मां बहुत मेहनती और अच्छी होती है। वह अपनी सहेलियों की मदद भी करती है। हमारी मां हमें सब कुछ सिखाती है तब हमें भी लगता है कि हम जिम्मेदारी में बड़े हो गए हैं।जैसे येमी को भी लगता है कि वह थोड़ी बड़ी हो गई है मैं भी जब छोटी थी तब मैं अपनी मां की घर के कामों में मदद करती थी और मेरे से छोटे भाई बहन का पूरा ख्याल रखती थी।